– तय्यब ज़फ़र
जब देश का एक प्रसिद्ध वैज्ञानिक शिक्षाविद और समाज के प्रति समर्पित व्यक्ति सोनम वांगचुक पिछले 19 दिनों से आमरण अनशन पर बैठा हो, और उसकी मांग सिर्फ़ इतनी हो कि, NEET पेपर लीक जैसे गंभीर मामले में जिम्मेदारी तय की जाए l तब किसी भी लोकतांत्रिक सरकार का कर्तव्य बनता है कि, वह उसकी बात सुने l लेकिन दुख की बात है कि, 19 दिन बीत जाने के बाद भी सरकार की ओर से कोई ठोस कदम दिखाई नहीं देता l सोनम वांगचुक जी की सेहत लगातार बिगड़ रही है l फिर भी सत्ता की खामोशी जारी है यह सिर्फ़ एक व्यक्ति की लड़ाई नहीं, बल्कि देश के लाखों विद्यार्थियों और उनके भविष्य की लड़ाई है l
ऐसे कठिन समय में वंचित बहुजन आघाड़ी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ॲड. बाळासाहेब आंबेडकर का जंतर मंतर पहुँचकर सोनम वांगचुक जी से मुलाकात करना केवल एक राजनीतिक घटना नहीं बल्कि इंसानियत, लोकतंत्र और संविधान के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने का उदाहरण है l
आंबेडकर परिवार ने हमेशा सत्ता के साथ नहीं बल्कि जनता के साथ खड़े होने की परंपरा निभाई है l चाहे सामाजिक न्याय का सवाल हो, शिक्षा का अधिकार हो, किसानों, मजदूरों, युवाओं या वंचित समाज की आवाज़ हो आंबेडकर परिवार ने हर दौर में जनता के अधिकारों की लड़ाई को अपनी लड़ाई माना है l
भारत का संविधान हमें केवल मतदान का अधिकार नहीं देता बल्कि अन्याय के खिलाफ शांतिपूर्ण तरीके से आवाज़ उठाने का भी अधिकार देता है l जब कोई नागरिक लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांग रखता है तब उसकी बात सुनना सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी होती है न कि उसे अनदेखा करना l
नीट पेपर लीक ने देश के लाखों मेहनती विद्यार्थियों का भरोसा तोड़ दिया l वर्षों की मेहनत सपने और भविष्य भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गए l ऐसे गंभीर मामले में जवाबदेही तय होने के बजाय यदि सरकार चुप रहे तो यह लोकतंत्र और शिक्षा व्यवस्था दोनों के लिए चिंता का विषय है l
वंचित बहुजन आघाड़ी स्पष्ट रूप से मांग करती है कि, केंद्रीय शिक्षा मंत्री नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए तत्काल इस्तीफा दें ताकि देश के विद्यार्थियों का विश्वास बहाल हो सके और सोनम वांगचुक जी का अनशन सम्मानजनक तरीके से समाप्त हो l आज राजनीति करने का समय नहीं, बल्कि एक इंसान की जान बचाने का समय है l यदि आज भी संवेदनशील लोग आवाज़ नहीं उठाएंगे तो आने वाली पीढ़ियाँ हमसे सवाल करेंगी कि, जब एक देशभक्त वैज्ञानिक न्याय की मांग करते हुए भूखा बैठा था तब हम कहाँ थे? संविधान हमें सिखाता है कि, सत्ता से बड़ा जनता का हित होता है और जब तक इस देश में अन्याय के खिलाफ खड़े होने वाले लोग मौजूद हैं तब तक लोकतंत्र और संविधान की आत्मा जीवित रहेगी l





