नागपुर : आरएसएस के मुख्यालय पर आज विशाल संयुक्त जन आक्रोश मोर्चा निकाला गया, जिसका नेतृत्व वंचित बहुजन आघाड़ी के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रकाश आंबेडकर ने किया। इस दौरान उन्होंने केंद्र सरकार, आरएसएस और देश की विदेश नीति पर बेहद आक्रामक और सवालों से भरा भाषण दिया।
अपने संबोधन में आंबेडकर ने कथित रूप से गिरे पांच राफेल विमानों का मुद्दा उठाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत से सीधे जवाब मांगा। उन्होंने सवाल किया कि इन पांच राफेल विमानों में से कितने भारत की सीमा में गिरे और कितने पाकिस्तान में गिरे। उन्होंने यह भी पूछा कि यदि कोई विमान पाकिस्तान में गिरा है तो उसके पायलट कहां हैं, क्या उन्हें वापस लाया गया है या नहीं। (Prakash Ambedkar)
आंबेडकर ने कहा कि देश के लिए लड़ने वाले सैनिकों की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है और इस पर जवाबदेही तय होनी चाहिए। उन्होंने सनातनवादियों से भी अपील की कि वे भी इन सवालों को नरेंद्र मोदी से पूछें।
उन्होंने विपक्षी दलों से कहा कि आरएसएस और सरकार से डरने की जरूरत नहीं है। “जेल में डालने या दबाव बनाने से डरकर सवाल पूछना बंद नहीं होना चाहिए,” ऐसा उन्होंने कहा। (Prakash Ambedkar)
अपने भाषण में आंबेडकर ने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए यह भी कहा कि उन्हें धमकियां दी गईं, लेकिन उन्होंने साफ कहा कि वे न डरेंगे और न झुकेंगे। उन्होंने खुद को एक “फकीर” बताते हुए कहा कि उनके पास कोई संपत्ति नहीं है और उन्होंने जीवन में न भ्रष्टाचार किया है और न रिश्वत ली है, फिर भी वे सत्ता को खुली चुनौती दे रहे हैं।
विदेश नीति पर बोलते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि भारत की नीति अमेरिका के प्रभाव में काम कर रही है। उन्होंने कहा कि ईरान जैसे देशों ने हमेशा भारत का साथ दिया है, यहां तक कि आर्थिक प्रतिबंधों के बावजूद भारत को रुपये में तेल देने की पेशकश की थी। ऐसे मित्र देशों के साथ भारत को वफादारी निभानी चाहिए। (Prakash Ambedkar)
उन्होंने इज़राइल के संदर्भ में कहा कि भारत को उसकी मदद की जरूरत नहीं है, क्योंकि भारतीय सेना और वायुसेना स्वयं सक्षम हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि कई मामलों में रूस ने भारत की मदद की है और खुफिया जानकारी उपलब्ध कराई है।
आंबेडकर ने स्पष्ट किया कि उनका विरोध किसी धर्म या ब्राह्मण समाज के खिलाफ नहीं है, बल्कि केवल आरएसएस की विचारधारा के खिलाफ है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस आंदोलन को गलत तरीके से पेश करने की कोशिश न की जाए। (Prakash Ambedkar)
उन्होंने सभी राजनीतिक दलों विशेष रूप से कांग्रेस, सीपीएम और अन्य दलों से अपील की कि इस आंदोलन का केंद्र दिल्ली बनाया जाए और लाखों लोगों को इकट्ठा कर केंद्र सरकार से जवाब मांगा जाए। उन्होंने दावा किया कि यदि ऐसा हुआ तो आगामी चुनावों में बीजेपी को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा।
अंत में आंबेडकर ने कहा कि देश की स्वतंत्रता, स्वायत्त विदेश नीति और लोकतंत्र को बचाने के लिए सभी को एकजुट होना होगा। उन्होंने जनता से अपील की कि वे डरें नहीं और 10-15 दिनों के भीतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इन मुद्दों पर जवाब मांगें। (Prakash Ambedkar)
भाषण का समापन उन्होंने “जय हिंद, जय भारत” के नारों के साथ किया।






